कुछ विकास की भेंट चढे तो कुछ आंसु बहा रहे अपनी दुर्दशा पर, बेखबर जनप्रतिनिधि लापरवाह अधिकारी परेशान जनता | डा.लक्ष्मीनारायण वैष्णव
मध्यप्रदेश / दमोह - जब से मध्यप्रदेश राज्य की स्थापना हुई प्रदेश में किसी भी दल की सरकार रही हो दो विधायकों को प्रदेश सरकार में मंत्री के रूप में प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला परन्तु हाय रे जिले का दुर्भाग्य कि समस्याओं के हल होने की बात तो छोडो अंबार बढता ही गया। जनता ने जिसे चुना उसने ही उससे मुंह मोडा अगर एैसा कहा जाये तो शायद कोर्इ अतिश्योक्ति निही होगी। इसलिये अगर देखा जाये तो जितना जिम्मेदार सत्ता पक्ष है तो उतना ही जबाबदार विपक्ष भी है सत्ता पक्ष के लोग अगर सत्ता के मद मे चूर रहे तो विपक्ष अपने कर्तव्यों के प्रति मुंह मोडता रहा और बेचारी जनता इसका परिणाम आज भी भोग रही है। मित्रों आज की जो सबसे बडी समस्या दिखलायी दे रही है वह है जल की उसका हल क्यों नही हो पाया तो आप देखेंगे कि शायद मन और लगन से इसका हल करने का प्रयास किसी ने नही किया। नगर की ही सिथति पर नजर डालें तो आधा दर्जन से अधिक छोटे बडे सरोवर वाला क्षेत्र आखिर पानी के लिये क्यों तरस रहा है यह सोचने का विषय है।
विकास की भेंट चढ़े सरोवर-
इतिहास पर अगर नजर डालें तो नगर का ही एक वृहद सरोवर को मात्र इसलिये मीट्ठी और मलबे से पूर दिया गया क्योंकि वहां शापिंग सेन्टर का निर्माण किया जाना था। यह सब हुआ उस समय जब प्रदेश में और नगर पालिका में कांग्रेस सत्ता में थी, जी हां हम बात कर रहे हैं कचौरा तालाब की जो कि वर्तमान में कचौरा शापिंग सेन्टर के नाम से जाना जाता है। वही एक छोटा तालाब जिसे उमा मिट्ठी की तलैया के नाम से जाना जाता है वह भी समाप्त कर दिया गया। इसी क्रम में अगर देखें तो गत कुछ वर्षो पूर्व ही कैदों की तलैया के नाम से पहचाने जाने वाला छोटा सरोवर पूर दिया गया जहां आज मानस भवन एवं श्री गुरू गोलवरकर मार्केट स्थापित है। इस समय प्रदेश और नगर पालिका में भारतीय जनता पार्टी का शासन था। इतिहास की ओर नजर डालें तो नगर के ही मध्य का एक वृहद महज इसलिये मलवा और मीठी से पूर दिया गया कि वहां एक शापिंग सेंटर का निर्माण किया जाना था। जी हां हम बात कर रहे है कचौरा शापिंग सेंटर की जहां वर्तमान में दुकाने ही दुकाने नजर आ रही हैं। यही हाल उमा मीठी के नाम से विख्यात तलैया का हुआ। यहां यह उल्लेख कर देना आवश्यक हो जाता है कि इस समय प्रदेश में और नगर पालिका में कांग्रेस सत्ता में थी। वही कुछ ही बर्ष पूर्व एक और छोटा सरोवर जिसे कैदों की तलैया के नाम से जाना जाता था विकास की भेंट चढा दिया गया। वर्तमान में वहां मानस भवन और श्री गुरू गोलवरकर मार्केट स्थापित है। जिस समय यह कार्य हुआ उस समय प्रदेश और नपा में भाजपा सत्ता में काबिज थी।
लाखों खर्च फिर भी नतीजा सिफर-
देखा जाये तो कडोरों रूपयों की राशि सरोवरों की साफ-सफार्इ एवं गहरीकरण में हो चुके हैं फिर भी समस्या जस की तस बनी हुर्इ है। यह सिलसिला आज भी जारी है नगर के ही मध्य के ही फुटेरा तालाब की बात करें या फिर बेलाताल की तो जो कुछ हो रहा है या होता है किसी से छिपा नही है। बात करें फुटेरा तालाब की तो जानकारों केे अनुसार 30-35 एकड की परिधि में फैला है जबकि देखके इस बात का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है कि कितना क्षेत्र अतिक्रमणकारियों के पास है। ज्ञात हो कि यही वह तालाब है जहां दुर्गा एवं गणेश प्रतिमाओं का विर्सजन होता है और नगर की बडी आबादी इसके जल का इस्तेमाल करती है। वही अगर बेलाताल की बात करें तो आप देखेंगे कि छपा और दिखा रोग से पीढित बीमारी बढने पर उसका निदान कैसे करते नजर आते हैं सभी जानते हैं।
कोपरा एनिकट अधुरा इस बर्ष भी नही मिल पायेगा लाभ -
लगभग आधे शहर की प्यास बुझाने वाला कोपरा स्टाप डेम का कार्य कछुआ की गति से चलने के चलते लगता है कि इस वर्ष भी लोगो को इसके जल का लाभ नही मिल पायेगा। विदित हो कि कोपरा नदी पर रेल्वे बि्रज के लगभग 200 मीटर अप स्ट्रीम में पी.एच.र्इ.विभाग द्वारा 1974 में स्टापडेम का निर्माण कराया गया था। इसका उपयोग दमोह नगर को पेयजल प्रदाय हेतु होता रहा है। गत 11 सितम्बर 2009 को तेज बर्षा एवं नगर पालिका के आलाअधिकारियों की अदूदर्शिता के कारण स्टापडेम की दांयी तट की मीठी लगभग 60 मीटर कट गर्इ जिसके कारण नगर की जल प्रदाय योजना बंद हो गइ थी एवं रेल्वे बि्रज के दांयी तट को भी क्षति पहुंची थी। भविष्य में होने वाली क्षति को रोकने एवं दमोह नगर की जल प्रदाय योजना को सुचारू रूप से चलाने हेतु ओगी. वियर का निर्माण प्रस्तावित किया गया था। योजना की प्रशासकीय स्वी—ति जल संसाधन विभाग द्वारा प्रदाय की गर्इ थी। योजना पूर्ण करने हेतु टर्न एवं की पद्धति से निविदा आमंत्रित की गर्इ थी । प्राप्त निविदाओं में न्यूनतम निविदाकार्य की राशि 5 करो़ड 29 लाख 62 हजार की प्राप्त हुर्इ । योजना के पूर्ण होने पर दमोह नगर को 70 मि.घन फीट पानी पेयजल हेतु उपलब्ध रहेगा। तथा रेल्वे बि्रज को बा़ढ से क्षति नही होगी। योजना के तहत कैंचमेंट एरिया 630 वर्ग किलोमीटर, ओगीवियर की लम्बार्इ 60 मीटर, वियर की उंचार्इ 7.85 मीटर, सिस्टर्न की लम्बार्इ 30 मीटर और गार्इड बन्ड की लम्बार्इ 75 मीटर निर्धारित है। इसकी कि्रयान्वयन एजेंसी जल संसाधन विभाग है और निर्माण कार्य किस प्रकार चल रहा है सर्व विदित है। ज्ञात हो कि जल संसाधन मंत्री श्री मलैया द्वारा जिस कोपरा एनीकट का शिलान्यास 12 नवम्बर 2010 को किया गया था।
पांच बर्ष बीते नही बढ पायी उचांर्इ राजनगर की -
नगर की प्यास बुझाने के लिये एक और तालाब के जल का इस्तेमाल बषो± से किया जा रहा है वह है राजनगर जिसके निर्माण कार्य में उसकी उंचार्इ गत पांच बषो± में ढार्इ मीटर भी ही बढ पायी है। 2007 में प्रारंभ हुआ कार्य अभी भी अटका पडा है। जानकारों की माने तो पूर्व में सरोवर की उंचार्इ 367 मीटर थी जबकि उसको ढार्इ मीटर तक और उंचा करने के लिये कार्य प्रारभं किया गया था। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग ढार्इ करोड रूपयों का व्यय हो चुका है। वर्तमान में कार्य की सिथति क्या है सर्व विदित है।
छपा-दिखा रोग की बीमारी बढने का समय-
सरोवरों के जल का स्तर घट चुका है और वह गत वर्ष हुये साफ-सफार्इ एवं गहरीकरण की गाथा स्वयं लोगों के सामने कह रहे हैं। वही कुछ छपा एवं दिखा रोग से पीढित रोगियों की बीमारियां बढने वाली हैं जो कुछ फिल्मी तरीके से कुछ तसले मीठी को लेकर फोटो खिंचवा अखवारों एवं निजि चेनलों पर सुर्खियां बटोरने के लिये लालायित दिखलार्इ देंगे। वैसे देखा जाये तो गहरी करण साफ-सफार्इ का कार्य अधिकांशत:जून माह के मध्य में प्रारंभ होता है। कुछ दिन बाद बारिश प्रारंभ हो जाती है और लोग भूल जाते हैं उथले सरोवर जलमग्न और लाखों रूपयों की फाग खेल ली जाती है।
प्रारंभ होते ही बंद हुआ कार्य-
उक्त दीवान जी की तलैया की साफ-सफार्इ का कार्य प्रारंभ होते ही मात्र कुछ ही घंटों में बंद हो गया। एक छोटी जेसीबी मशीन और 3-4 टेक्द्रर द्राली के साथ प्रारंभ कराये गये उक्त कार्य के प्रारंभ होने पर ही आशंका उत्पन्न होना प्रारंभ हो गयी थी जो कि मा़त्र कुछ ही घंटों में सच्चार्इ में परिवर्तित हो गयी । सूत्रों की माने तो उक्त कार्य में लम्बी फाग खेलने की योजना बनायी गयी ह ैअब कितनी सच्चार्इ इसमें है यह तो समय आने पर सामने आ ही जायेगा।
लाखों खर्च कर गंदा नाला जोडा -
उक्त प्राचीन सरोवर दीवान जी की तलैया में नगर पालिका परिषद ने लाखों रूपयों की फाग खेलते हुये एक गंदे नाले को जोड इसे और गंदा बनाने में अपनी आहुति दे दी। जानकारों की माने तो विश्व में किसी भी गंदे नाले को किसी सरोवर से नहीं जोडा जा सकता है। जबकि यह कार्य खुलेआम हुआ और वह भी पुलिस की जमीन से होकर कहा जाये कि पुलिस की छाती पर खुटा गाडकर तो शायद कोर्इ अतिश्योकित नहीं होगी।
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